पेंतीस कि हो चुकी तो क्या, कभी हीरोपंती जाती है ?
उमर ये जिद्दी बच्चे कि, क्या ऐसे ही मन जाती है ?
कभी अगर तकरार करे तो, सारी रात जगाती है,
नींद बेवक्त बारिश जैसी, सुबह सवेरे आती है,
उमर ये जिद्दी बच्चे कि, क्या ऐसे ही मन जाती है ?
कभी अगर तकरार करे तो, सारी रात जगाती है,
नींद बेवक्त बारिश जैसी, सुबह सवेरे आती है,
जुल्फ़े जो मक्कार बनीं तो, सरसे उड़ती जाती है,
बरस चुकी बदरी सरीकी, बचीं श्वेत लहराती है,
कभी कभारे साँझ ढले जब, कुछ रंगो के चित्र बनाकर,
श्वेत श्याम सिनेमा के जैसी, कुछ अरसे याद दिलाती hai,
कभी किसी से आँख लड़े तो, दिल मैं कुछ अरमान जगे तो,
उमर कम्बख्त चालाकी से शादी कि याद दिलाती है,
उम्र है काम की वस्तु जैसी, जब ढूंढो छिप जाती है,
कोई न जानें किस राह पर फिर से यह मिल जाती है,
उम्र तो केवल पगडंडी सी पथिकों से भर जाती है,
जब चलने वाला बढ़ता तब पगडण्डी रुक जाती है,
पर कैसा यह विस्मय है के चलने वाला बढ़ता है,
पगडंडी तो साधन, साधक किसके पीछे पड़ता है,
गर उम्र न सच होती तो क्यूँ बुद्धि बढ़ती जाती,
हर मथनी के चक्र पे छछिया मख्खन क्यूँ बनाती,
सच तो यह के उम्र से बुध्ही बल दोनों बढ़ता है,
कभी ज्यादा तो थोडा सा वह कभी कम पड़ता है,
बुद्धि से तुम काम करो और दिल को और जवान करो,
दुनिया तो उन्हें ही जीताती जिन्हें हीरोपंती आती hai,
पेंतीस कि हो चुकी तो क्या, कभी हीरोपंती जाती है ?
उमर ये जिद्दी बच्चे कि, क्या ऐसे ही मन जाती है ?
बरस चुकी बदरी सरीकी, बचीं श्वेत लहराती है,
कभी कभारे साँझ ढले जब, कुछ रंगो के चित्र बनाकर,
श्वेत श्याम सिनेमा के जैसी, कुछ अरसे याद दिलाती hai,
कभी किसी से आँख लड़े तो, दिल मैं कुछ अरमान जगे तो,
उमर कम्बख्त चालाकी से शादी कि याद दिलाती है,
उम्र है काम की वस्तु जैसी, जब ढूंढो छिप जाती है,
कोई न जानें किस राह पर फिर से यह मिल जाती है,
उम्र तो केवल पगडंडी सी पथिकों से भर जाती है,
जब चलने वाला बढ़ता तब पगडण्डी रुक जाती है,
पर कैसा यह विस्मय है के चलने वाला बढ़ता है,
पगडंडी तो साधन, साधक किसके पीछे पड़ता है,
गर उम्र न सच होती तो क्यूँ बुद्धि बढ़ती जाती,
हर मथनी के चक्र पे छछिया मख्खन क्यूँ बनाती,
सच तो यह के उम्र से बुध्ही बल दोनों बढ़ता है,
कभी ज्यादा तो थोडा सा वह कभी कम पड़ता है,
बुद्धि से तुम काम करो और दिल को और जवान करो,
दुनिया तो उन्हें ही जीताती जिन्हें हीरोपंती आती hai,
पेंतीस कि हो चुकी तो क्या, कभी हीरोपंती जाती है ?
उमर ये जिद्दी बच्चे कि, क्या ऐसे ही मन जाती है ?
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